चौघड़िया क्या है?
चौघड़िया का शाब्दिक अर्थ है "चार घड़ी" — लगभग डेढ़ घंटे की एक अवधि। यह पारंपरिक भारतीय कालगणना की एक पद्धति है जिसमें दिन और रात को आठ-आठ भागों में बाँटकर कुल सोलह अवधियाँ बनाई जाती हैं, और हर अवधि को एक ग्रह का स्वामित्व दिया जाता है।
सात नाम, सात ग्रह। अमृत का स्वामी चंद्र है, शुभ का गुरु, लाभ का बुध, चर का शुक्र, रोग का मंगल, काल का शनि और उद्वेग का सूर्य। ग्रंथों में इन नामों के साथ जो अर्थ जुड़े हैं वे सामान्य जीवन के संदर्भ में हैं — किसी बाज़ार या लेन-देन के संदर्भ में नहीं।
गणना कैसे होती है। सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है; हर भाग एक चौघड़िया है। यही सूर्यास्त से अगले सूर्योदय तक दोहराया जाता है। चूँकि दिन की लंबाई मौसम और स्थान के साथ बदलती है, हर अवधि ठीक डेढ़ घंटे की नहीं होती — यह उस दिन के वास्तविक सूर्योदय और सूर्यास्त पर निर्भर करती है।
क्रम वार से तय होता है। दिन के चौघड़िया का पहला भाग उस वार के स्वामी ग्रह का होता है — रविवार को उद्वेग, सोमवार को अमृत, इत्यादि — और उसके बाद एक निश्चित क्रम चलता है। रात का क्रम दिन से भिन्न होता है, इसलिए दोनों अलग-अलग देखे जाते हैं।
राहुकाल से अंतर। राहुकाल दिन का एक ही निश्चित भाग होता है जो वार के अनुसार बदलता है, जबकि चौघड़िया पूरे दिन और रात को सोलह भागों में बाँटता है। दोनों अलग गणनाएँ हैं और अक्सर आपस में मिला दी जाती हैं।
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